दीपावली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं है। यह पांच दिन तक चलता है और हर दिन की अपनी परंपरा और महत्व है। यह लेख पहली बार 2024 में लिखा गया था और अक्टूबर 2026 के लिए अपडेट किया गया है। इसमें आपको पांचों दिन की तारीखें, मतलब और कुछ काम की सलाह मिलेगी।

2026 की तारीखें एक नज़र में
- धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): शनिवार, 7 नवंबर 2026
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा): रविवार, 8 नवंबर 2026
- गोवर्धन पूजा: सोमवार, 9 नवंबर 2026
- भाई दूज: मंगलवार, 10 नवंबर 2026
अलग-अलग पंचांगों में तिथि के घटने-बढ़ने के कारण गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तारीख़ में एक दिन का फ़र्क दिख सकता है। पूजा का सही शुभ मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने नज़दीकी मंदिर या पंचांग से पुष्टि कर लें। लक्ष्मी पूजा आमतौर पर शाम के समय, यानी प्रदोष काल में की जाती है।
पांच दिन, पांच परंपराएं
1. धनतेरस
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, जिन्हें आयुर्वेद का देवता माना जाता है। लोग इस दिन सोना, चांदी, बर्तन या झाड़ू जैसी चीज़ें खरीदते हैं और शाम को दीपक जलाते हैं। इस साल सोने के दाम काफी ऊंचे हैं, इसलिए खरीदारी की योजना सोच-समझकर बनाएं। हमारा धनतेरस पर सोना खरीदने का गाइड (अंग्रेज़ी में) इसमें मदद कर सकता है।
2. नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली
इस दिन को रूप चौदस और काली चौदस भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था। कई जगह लोग सुबह उबटन लगाकर स्नान करते हैं और शाम को घर के बाहर यम के नाम का दीया जलाते हैं।
3. दीपावली और लक्ष्मी पूजा
यह पर्व का मुख्य दिन है। घरों और दुकानों को साफ करके सजाया जाता है, रंगोली बनती है और शाम को माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। चारों तरफ दीये जलाए जाते हैं। व्यापारी समुदाय के लिए यह नए खाता-बही यानी चोपड़ा पूजन का दिन भी होता है।
4. गोवर्धन पूजा या अन्नकूट
इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा याद की जाती है। मंदिरों में अन्नकूट बनता है, यानी कई तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। गाय और पशुओं की पूजा भी की जाती है।
5. भाई दूज
भाई-बहन के प्यार का त्योहार। बहनें भाई को तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं और उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई बहन को उपहार देता है।

लक्ष्मी पूजन की सरल विधि
हर परिवार और इलाके की अपनी परंपरा होती है। आम तौर पर बताई जाने वाली सरल विधि कुछ इस तरह है:

- सफ़ाई और सजावट: पूजा से पहले घर की सफ़ाई करें, मुख्य द्वार पर रंगोली और दीये सजाएं।
- स्थान की तैयारी: साफ़ चौकी पर कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा या चित्र रखें। कई घरों में उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है।
- पूजन सामग्री: कुमकुम या रोली, अक्षत (चावल), फूल, दीपक, मिठाई, बताशे, नारियल और फल रखे जाते हैं। कई लोग कमल के फूल का भी उपयोग करते हैं।
- पूजा का क्रम: पहले गणेश जी की पूजा, फिर माता लक्ष्मी की। दीपक जलाकर आरती की जाती है।
- मंत्र: श्रद्धा से लक्ष्मी मंत्र, जैसे “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”, का जाप किया जाता है। जप की संख्या अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार तय करें।
- प्रसाद और दान: पूजा के बाद परिवार में प्रसाद बांटें और ज़रूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या मिठाई दें।
कई व्यापारी इसी दिन नए बही-खाते की पूजा (चोपड़ा पूजन) करते हैं। शेयर बाज़ार भी इस दिन मुहूरत ट्रेडिंग का विशेष सत्र रखता है (अंग्रेज़ी में जानकारी)।
सुरक्षित और बजट वाली दिवाली के सुझाव
- बजट पहले बनाएं। सजावट, मिठाई, उपहार और खरीदारी के लिए अलग-अलग रकम तय करें। दिवाली का बजट कैसे बनाएं (अंग्रेज़ी में) पढ़ें।
- हवा का ध्यान रखें। उत्तर भारत के कई शहरों में दिवाली के बाद वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। अपने शहर के पटाखों से जुड़े नियम जानें और कम धुएं वाले विकल्प चुनें।
- आग से सावधानी। दीये और मोमबत्ती बच्चों और पर्दों से दूर रखें। पटाखे जलाते समय पानी की बाल्टी पास रखें।
- मिलावट से बचें। त्योहार के समय मिठाई और खोया की मिलावट की खबरें आती हैं। भरोसेमंद दुकान से लें और ताज़ी मिठाई ही खाएं।
- ऑनलाइन ठगी से बचें। सेल के नाम पर आने वाले अनजान लिंक और फर्जी ऑफर पर पैसे न भेजें।
- पालतू जानवरों का ख्याल रखें। पटाखों की तेज़ आवाज़ उन्हें डरा देती है।
इस पर्व का साझा मतलब
अलग-अलग इलाकों में दिवाली की कथाएं और रीति-रिवाज़ अलग हैं। कहीं भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में, कहीं लक्ष्मी पूजा के रूप में, तो कहीं नए साल की शुरुआत के रूप में यह मनाई जाती है। लेकिन हर जगह मूल भाव एक है: अंधेरे पर रोशनी की जीत और अपनों के साथ खुशियां बांटना।
सोचने वाले सवाल
- आपके परिवार में दिवाली का सबसे यादगार रिवाज़ क्या है, जो आप आगे भी निभाना चाहेंगे?
- क्या त्योहार मनाने के साथ-साथ हवा और पर्यावरण का ध्यान रखना संभव है? आप क्या बदलाव करेंगे?
- क्या दिवाली पर खर्च की एक सीमा तय करना आपके लिए मुश्किल होता है?
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स्रोत
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। तिथियां और मुहूर्त अलग-अलग पंचांगों में थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने शहर के पंचांग से पुष्टि कर लें।




