करवा चौथ, जिसे करक चतुर्थी भी कहते हैं, उत्तर और पश्चिम भारत का एक जाना-माना व्रत है। इस दिन विवाहित महिलाएं सुबह से चांद दिखने तक उपवास रखती हैं और परिवार की सुख-शांति और अपने जीवनसाथी की लंबी आयु की कामना करती हैं। यह लेख पहली बार 2024 में लिखा गया था और अक्टूबर 2026 में नई जानकारी के साथ अपडेट किया गया है। इसमें तारीख, पूजा का समय, व्रत की विधि, कथा का सार और सेहत के लिए ज़रूरी बातें आसान भाषा में दी गई हैं।

एक नज़र में
- तारीख (2026): ज़्यादातर पंचांगों के अनुसार बुधवार, 28 अक्टूबर 2026। कुछ वेबसाइटें 29 अक्टूबर बताती हैं, इसलिए अपने शहर के पंचांग से पुष्टि कर लें।
- पूजा का समय (दिल्ली, अनुमानित): शाम लगभग 5:39 से 6:56 बजे के बीच।
- चांद निकलने का समय (दिल्ली, अनुमानित): रात लगभग 8:14 बजे। हर शहर में यह समय अलग होता है।
- व्रत का तरीका: सुबह सरगी, दिन भर निर्जला या फलाहारी उपवास, शाम को पूजा और चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलना।
करवा चौथ का महत्व
यह पर्व कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की पूजा करती हैं। मिट्टी या धातु के करवे में जल भरकर चांद को अर्घ्य देने की प्रथा है। बहुत से परिवारों के लिए यह दिन पति-पत्नी के रिश्ते के साथ-साथ पूरे परिवार के मेल-जोल का भी मौका होता है। आजकल कई पति भी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं, और यह हर परिवार का अपना फ़ैसला होता है।

व्रत की विधि, क्रम से
1. सरगी (सूर्योदय से पहले)
पंजाब और आसपास के इलाकों में सास अपनी बहू को सरगी देती है। इसमें फल, मेवे, मिठाई, पराठा या फेनी जैसी चीज़ें होती हैं। सूर्योदय से पहले इसे खाकर व्रत शुरू किया जाता है।
2. दिन में व्रत
परंपरागत रूप से यह निर्जला व्रत है, यानी दिन भर अन्न और जल नहीं लिया जाता। कई महिलाएं अपनी सेहत देखकर फलाहार या पानी के साथ भी व्रत रखती हैं।
3. शाम की पूजा
शाम को महिलाएं तैयार होकर, अक्सर श्रृंगार करके, समूह में कथा सुनती हैं। थाली में दीया, रोली, चावल, मिठाई, छलनी और करवा रखा जाता है। कथा का सार यह है कि एक रानी वीरवती ने व्रत रखा, लेकिन चांद दिखने से पहले ही उसे धोखे से व्रत तुड़वा दिया गया, और बाद में सच्चे मन से व्रत करने पर उसे फल मिला। इस कथा के अलग-अलग इलाकों में अलग रूप मिलते हैं।
4. चांद को अर्घ्य और व्रत खोलना
चांद निकलने पर महिलाएं छलनी से चांद और फिर पति को देखती हैं, चांद को जल चढ़ाती हैं और पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं। उसके बाद भोजन किया जाता है।
परंपरा के अनुसार माने जाने वाले मुख्य नियम
अलग-अलग परिवारों और इलाकों में रीति-रिवाज़ थोड़े अलग होते हैं, लेकिन आम तौर पर ये बातें मानी जाती हैं:
- सुबह की शुरुआत: सूर्योदय से पहले उठकर सरगी खाई जाती है। स्नान के बाद साफ़ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लिया जाता है, यानी हाथ में जल लेकर व्रत रखने की प्रार्थना की जाती है।
- पहनावा और श्रृंगार: इस दिन लाल या चटख रंग के कपड़े पहनने की परंपरा है। मेहंदी, सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियां, बिंदी और बिछिया जैसे श्रृंगार किए जाते हैं।
- चांद के बाद व्रत खोलना: परंपरा में व्रत चांद के दर्शन और अर्घ्य के बाद ही खोला जाता है।
- मिट्टी का करवा: अर्घ्य के लिए अक्सर मिट्टी का करवा इस्तेमाल होता है, जिसे शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।
- दान: पूजा के बाद श्रृंगार का सामान, जैसे चूड़ियां, बिंदी और सिंदूर, घर की बड़ी महिला या सास को देने की प्रथा है। कई लोग ज़रूरतमंदों को भोजन या वस्त्र भी देते हैं।
- पूजा की दिशा: कई जगह पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने को शुभ माना जाता है।
2024 की तारीख क्यों बदलती है?
करवा चौथ हिंदू पंचांग की तिथि के हिसाब से आता है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती है। 2024 में यह 20 अक्टूबर को था। 2026 में चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर की दोपहर से शुरू होकर 29 अक्टूबर की दोपहर तक चलने की बात कही गई है, इसलिए ज़्यादातर पंचांग 28 अक्टूबर की शाम को चांद दिखने के हिसाब से व्रत मानते हैं।
सेहत के लिए ज़रूरी सावधानियां
- गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी वाले लोग निर्जला व्रत से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
- सरगी में प्रोटीन और फाइबर वाली चीज़ें, जैसे मेवे, दही, फल और दलिया, शामिल करें। इससे दिन भर ऊर्जा बनी रहती है।
- दिन में धूप में ज़्यादा देर न रहें और ज़्यादा मेहनत वाले काम से बचें।
- व्रत खोलते समय पहले पानी या शरबत लें, फिर हल्का भोजन करें। एकदम से तला-भुना या बहुत मीठा न खाएं।
- चक्कर, कमज़ोरी या घबराहट हो तो व्रत तोड़ने में हिचकिचाएं नहीं। सेहत सबसे ऊपर है।
कहां पूछें, कहां देखें
पूजा और चांद निकलने का सही समय आपके शहर के हिसाब से कुछ मिनट अलग हो सकता है। इसलिए अपने नज़दीकी मंदिर, पंडित या भरोसेमंद पंचांग से समय की पुष्टि कर लें। त्योहार के पास आने पर कई ऐप चांद निकलने का लाइव समय भी बताते हैं।
सोचने वाले सवाल
- क्या आपके परिवार में करवा चौथ का तरीका समय के साथ बदला है, जैसे पति का साथ में व्रत रखना या फलाहार?
- क्या सेहत की ज़रूरत को देखते हुए व्रत के नियमों में छूट देना सही है?
- ऐसे त्योहारों की सही तारीख और समय के लिए आप किस पर सबसे ज़्यादा भरोसा करते हैं: पंचांग, पंडित या ऐप?
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स्रोत
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। तारीखें और समय अलग-अलग पंचांगों में थोड़े अलग हो सकते हैं। सेहत से जुड़ा कोई भी फ़ैसला अपने डॉक्टर से पूछकर लें।




